Wednesday, May 23, 2012

आज सुबह RNDTV पर एक पोल देखा |




प्रश्न था की "अगर आज चुनाव हो जाते हैं तो आप किसको वोट देंगे ? "
सभी जानते हैं की हमारे देश में मतदान गुप्त होता है , तो इस दलाल चेनल को यह प्रश्न पूछने का अधिकार किसने दे दिया ? उससे अधिक हास्यास्पद बात यह रही की इसका परिणाम ऐसा रहापोर्न्ग्रेस : 75%भारतीय जनता पार्टी : 25%
सब लोग देख रहे हैं की सोशियल मिडिया ने इन पोर्न्ग्रेसियों की अच्छी बेन्ड बजायी हुयी है | आज ट्विटर पर #Narendramodiaspm के अंतर्गत लाखो लोगों ने नए तथ्यों के साथ मोदी जी को प्रधानमंत्री बनने की इच्छा व्यक्त की है और अभी भी ट्रेंड जारी है |
अब प्रश्न यह उठता है की ऐसे कौनसे लोग हैं जो सिर्फ इन rNDTV वालों को ही अपनी राय देना चाहते हैं और कही नहीं ?
हाँ दोस्तों आप सही समझे , यह सब सेट किया हुआ पोल है | जो पोर्न्ग्रेसी दुसरे समाचारों द्वारा मोदी जी को प्रधानमंत्री बनते नहीं देख पा रहे हैं उनको " आरक्षित " पोल दिखाकर वाहवाही लूटने तथा उगाही करने के लिए आमंत्रण दिया जा रहा है |
नीचे पढ़िए इस बागड़ बिल्ले चेनल के मालिक और उसकी पत्नी द्वारा मचाई गयी करोड़ों की लूट का कच्चा चिटठा |
यह एक ऐसे घोटाले की खबरे हैं जिसे पढ़ कर आप बरखा दत्त और वीर सांघवी के कर्म भूल जाएंगे। यह घोटाला करने का आरोप भी एनडीटीवी के चेयरमैन प्रणय राय पर है और इसे गंभीरता से लेने पर प्रणय राय हर्षद मेहता और केतन पारिख से ज्यादा अलग नजर नहीं आएंगे।
यह इल्जाम किसी आम आदमी ने नहीं लगाया। देश के सबसे सम्मानित पत्रकारों में से एक, भूतपूर्व सांसद, हेडलाइंस टुडे चैनल के मुखिया और संडे गार्जियन के संपादक एम जे अकबर ने बाकायदा लिख कर लगाया है और प्रणय राय और उनकी राधिका राय को चुनौती दी है कि इसका खंडन करे। यह घोटाला आईसीआईसीआई बैंक के साथ मिल कर किया गया बताया गया है।
घोटाले का तौर तरीका बताता है कि आर आर आर आर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के पास एनडीटीवी के अपार शेयर पडे हैं। इन शेयरों की कीमत नकली खरीददारी कर के जुलाई और अक्टूबर 2008 के बीच बढ़ा चढ़ा कर 439 रुपए प्रति शेयर बताई गई। कहा गया कि शेयर बढ़ रहे हैं इसलिए कंपनी अपनी शेयर वापस खरीदना चाहती है मगर उसके पास नकदी नहीं है। ईमानदार एनडीटीवी ने इंडिया बुल्स फाइनेंस सर्विस से 9070297 शेयर गिरवी रख कर 363 करोड़ रुपए ले लिए। यह कर्ज था और जुलाई 2008 में लिया गया था। अगस्त 2008 को शेयर बाजार लुढ़क गया। इंडेक्स 22 हजार से घट कर दस हजार पर आ गया औरएनडीटीवी के शेयर की कीमत 100 रुपए रह गई। इंडिया बुल्स ने एनडीटीवी से कहा कि हमारा पैसा वापस करो।
एनडीटीवी हमेशा की तरह कंगाल था। प्रणय राय ने अपनी साख का सहारा ले कर और शायद बरखा दत्त के टाटाओं, अंबानियों और राडियाओं से रिश्तों को इस्तेमाल कर के आईसीआईसीआई बैंक से अक्टूबर 2008 में 4741721 शेयरों के बदले 375 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और ये वे शेयर थे जो आर आर आर आर नाम की अज्ञात कंपनी के पास थे। आईसीआईसीआई की चंदा कोचर जानबूझ कर अंधी हो गई और उन्होंने 100 रुपए का शेयर 439 रुपए का मान कर गिरवी रख लिया। यह पहला बड़ा घोटाला था।
इसके बाद एक और आर्थिक शातिर चाल में शेयर्स का दाम 23 अक्टूबर 2008 को 99 रुपए रह गया और 375 करोड़ के कर्जे के बदले बैंक के पास सिर्फ 47 करोड़ की गारंटी मौजूद रह गई और अब इस शून्य को भरना था। आर आर आर आर कंपनी के बारे में पता चला कि इसके मालिक प्रणय राय और राधिका राय हैं और जुलाई 2008 से पहले इसके पास एनडीटीवी का एक भी शेयर नहीं था और इसकी कुल पूंजी ही मात्र एक लाख रुपए थी। धंधा यह जरूर सैकड़ों का कर रही थी। केतन पारिख ने ये किया तो बेचारा जेल में और प्रणय राय देश को ज्ञान बांटने का पेशा कर रहे हैं।
अभी आघात खत्म नहीं हुए हैं। पैसा का हेर फेर हो जाने के कुछ ही दिन बाद पति पत्नी की चार बार आर नाम वाली कंपनी को चंदा कोचर की बैंक ने लगभग 74 करोड़ का कर्ज फिर दे दिया। यह गैर कानूनी था और अनैतिक भी। कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी खामोश रहा।
नवंबर में सीबीआई ने जब जीवन बीमा निगम और अन्य बैंकों के अधिकारियों को कुख्यात कर्ज घोटाले में पकड़ा तो पता चला कि एनडीटीवी विदेशों से भी मोटा कर्जा लेता रहता है और उसके बदले वही शेयर गिरवी रखता रहता है जो भारत में दूसरों के पास गिरवी रखे होते हैं। इसके लिए एनडीटीवी की विदेशों में कुछ फर्जी कंपनियां भी है।
अब बिक चुके एनडीटीवी इमेजिन के दस रुपए के शेयर 776 रुपए में बेचे गए। यह तब हुआ जब चैनल बिक जाने के बावजूद घाटे में हैं। मगर प्रणय राय ने नकली तौर पर बढ़ाए गए दामों का एक पैसा भारतीय शेयर धारकों को नहीं मिला। वैसे एनडीटीवी के शेयर लगातार लुढ़क रहे हैं और अब विदेशों से नाम भुनाने की कोशिश की जा रही है। जो कंपनियां एनडीटीवी के लिए विदेशों में काम कर रही है उनमें से एक का पता 90, हाई हॉल बॉर्न लंदन हैं और यह रैगरपुरा की तरह अपेक्षाकृत गरीब लोगों के रहने की बस्ती शायद इसी झोपड़पट्टी में प्रणय राय को अपना भविष्य नजर आ रहा हो।

Tuesday, April 24, 2012

बधाई हो !! आखिर धूर्त अभिषेक मनु सिंघवी ने ..संसद की स्थाई समिति एवं कांग्रेस प्रवक्ता पद से तो इस्तीफा दे ही दिया ..........ये कितनी ही नौटंकी कर ले इसके व्यभिचारी कारनामों का दंड तो इसे भोगना ही पडेगा ...............



देश में इस वक्त जब अनौपचारिक आपातकाल जैसे हालात हैं , जहाँ मुख्य धारा का मीडिया जगत कुछ बोलने सुनने को तैयार नहीं है , कल तक सनसनी का भूखा मीडिया आज अचानक जिम्मेदार हो गया है , वही इन्टरनेट जगत मानो जैसे क्रांति लाने को आतुर है , उसे किसी हाई कोर्ट के फैसले की परवाह नहीं , उसे किसी साइबर कानून की फिक्र नहीं , धड़ल्ले से कभी एक पर तो कभी दूसरी वेबसाईट पर उस विडियो को अपलोड कर दिया जा रहा है !!
अभी अभी पता चला है की विडियो में जो महिला वकील साहिबा दिख रही हैं उनको हाई कोर्ट के जज के लिए २०१० में सिफारिश किया जा चुका है , सिफारिश करने वाली हाई कोर्ट की इस अधिशासी समिति में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ऐ पी शाह भी थे जो ये सिफारिशें करते ही रिटायर हो गए ! ( जैसा की सामान्यतः होता है )
परन्तु भाग्य से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस कपाडिया ने पांचो सिफारिशें रद्दी के टोकरे में डाल दी , और हाई कोर्ट की अधिशासी समिति को उन नामों पर पुनः विचार के लिए भेज दिया !!
किसी का नाम उछालने का उद्देश्य मेरा नहीं है , पर जिन पाँचों नामों की सिफारिशें की गयी थी , वे हैं - अभिनव वशिष्ट , राजीव विरमानी , अनुसूया सलवान , मीनाक्षी अरोरा , और मनिंदर आचार्य !! इन्ही में से एक वो महिला है जो शायद अपना दावा और मजबूत करवाने सिंघवी जी के पास गयी थीं !
अंत में, मेरे और आपके मन में बार बार ये सवाल आ रहा होगा की क्या ऐसी खबरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो किसी की निजी जिंदगी को ध्वस्त करती हो , तो बार बार मुझे यही जवाब मिलता है की हाँ अगर हमारे देश में जजों की सिफारिशें इस प्रकार होती हों तो मुझे फर्क पड़ता है , और मेरे जैसे हर आम आदमी को फर्क पड़ता है ! इसलिए बोलना तो बनता है !!

Sunday, March 18, 2012

भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर...

भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर की ज़िंदगी पर आधारित तिग्मांशु धूलिया फिल्म ‘पान सिंहतोमर’
बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है और दर्शकों द्वारा काफी पसंद भी की जा रही है। हालात से
मजबूर होकर हथियार उठाने वाले डकैत पान सिंह के बारे में कम ही लोग जानते हैं। चंबल के एक गांव के निवासी पान सिंह सात साल तक लगातार एथलेटिक्स के नेशनल चैंपियन रहे, मगर हालातों से मजबूर होकर वह डकैत बन गए। अपनी जमीन का हक पाने के लिए वे आठ साल तक जूते घिसते रहे। आखिर हालात से विवश होकर उन्होंने बंदूक उठाने का निर्णय लिया।



शायद २ साल से भी अधिक हो गये हों  मुझे कोई  पूरी फिल्म देखे हुए  .पिपली लाइव के    बाद पान सिंह तोमर मैंने फिल्म देखि है ...और भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर...के बारें मे जानने का मुका मिला   .
मन सिंह तोमर का  जीवन कथा के बारें मे मैंने कुछ जानकारी ली   .लकिन असे कितने खिलाडी होंगे .जिनका हमने कभी जीकर तक नही सुना होगा .एक शब्द    ही किसी व्यक्ति की जीवन बदल देता है   .और एक शब्द ही पूरा जीवन नरक बनना सकता है .अगर हमारी फिल्मे ,बचो की शिक्षा हमारे धर्म ,और देश भगतो पर आधारित हो .उस का जो फायेदा होगा  उस का वर्णन नही किया जा सकता .  इन सब के आभाव के कारन हम पाश्चात्य   जगत के अंधकार मे गिरे जा रहे है .


3000 मीटर स्टीपलचेस में सात बार के राष्ट्रीय चैम्पियन, 1958 के
टोक्यो एशियन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सूबेदार पान सिंह तोमर को चम्बल का नामी डकैत बनना पड़ा था... और एक अक्तूबर 1981 को पुलिस एनकाउन्टर में उनकी मौत हुई..