Sunday, March 18, 2012

भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर...

भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर की ज़िंदगी पर आधारित तिग्मांशु धूलिया फिल्म ‘पान सिंहतोमर’
बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है और दर्शकों द्वारा काफी पसंद भी की जा रही है। हालात से
मजबूर होकर हथियार उठाने वाले डकैत पान सिंह के बारे में कम ही लोग जानते हैं। चंबल के एक गांव के निवासी पान सिंह सात साल तक लगातार एथलेटिक्स के नेशनल चैंपियन रहे, मगर हालातों से मजबूर होकर वह डकैत बन गए। अपनी जमीन का हक पाने के लिए वे आठ साल तक जूते घिसते रहे। आखिर हालात से विवश होकर उन्होंने बंदूक उठाने का निर्णय लिया।



शायद २ साल से भी अधिक हो गये हों  मुझे कोई  पूरी फिल्म देखे हुए  .पिपली लाइव के    बाद पान सिंह तोमर मैंने फिल्म देखि है ...और भारत के गुमनाम एथलीट पान सिंह तोमर...के बारें मे जानने का मुका मिला   .
मन सिंह तोमर का  जीवन कथा के बारें मे मैंने कुछ जानकारी ली   .लकिन असे कितने खिलाडी होंगे .जिनका हमने कभी जीकर तक नही सुना होगा .एक शब्द    ही किसी व्यक्ति की जीवन बदल देता है   .और एक शब्द ही पूरा जीवन नरक बनना सकता है .अगर हमारी फिल्मे ,बचो की शिक्षा हमारे धर्म ,और देश भगतो पर आधारित हो .उस का जो फायेदा होगा  उस का वर्णन नही किया जा सकता .  इन सब के आभाव के कारन हम पाश्चात्य   जगत के अंधकार मे गिरे जा रहे है .


3000 मीटर स्टीपलचेस में सात बार के राष्ट्रीय चैम्पियन, 1958 के
टोक्यो एशियन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सूबेदार पान सिंह तोमर को चम्बल का नामी डकैत बनना पड़ा था... और एक अक्तूबर 1981 को पुलिस एनकाउन्टर में उनकी मौत हुई..

Saturday, January 21, 2012

वेलेन्टाईन डे की सच्चाई ...

 वेन्टाईलेन डे    कैसे शुरू हूआ...?  और आज................................




रोम के राजा क्लाउडियस ब्रहम्चर्य की महिमा से परिचित रहें होंगे, इसलिए अपने सैनिकों को शादी करने के लिए मना किया था ताकि वे शारीरिक बल और मानसिक दक्षता  से युद्ध  मे ं विजय प्राप्त कर सकें. सैनिको को शादी करने के लिये जबरदस्ती मना किया गया था. इसलिय   वेन्टाईलेन ने , टो स्वयं ईसाई पादरी होने के कारण  ब्रहम्चर्य  के विराधी नही हो सकते थे. गुप्त ढंग से उनकी शादियाँ करायी.राजा ने उनको दोषि घोषित किया और उन्हे फाँसी े दी गयी. सन्  446 से पोप गेलेसियस ने उनकी याद में , वेलेन्टाईन डे , मनाना शुरू किया.

     वेलेन्टाईन डे  मनाने वाले लोग वेलेन्टाईन का ही अपमान करते है. क्योकि वे शादी से पहले ही अपने प्रेमास्पद को वेलेन्टाईन कार्ड भेजकर उनसे प्रणय-संबंध स्थापित करने का प्रयास करते है. यदि    वेलेन्टाईन इससे सहमत होते तो वे शादियाँ कराते ही नही.

अत :भारत के युवान -युवतियाँ शादी से पहले प्रेम -दिवस के हाने अपने ओज-तेज-वीर्य का नाश करने सर्वनाश न करें परन्तु  मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें .

मेरे पू्ज्य गुरू देव  संत श्री आसाराम जी बापू का परम हितकारी संदेश..
प्रेम दिवस ( वेन्टाईलेन डे) के नाम पर विनाशकारी काम-विकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चिडचिडापन,तनाव, खोखलापन इस अंधपर्मपरा से सावधान हो  !

, इन्नोसन्टी रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 28 विकसित देशो मे हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं. उनमे से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 ङजार कुँवारी माता बन जाती हैं .  अमेरिका मे हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म  लेते हैं. और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगो के शिकार होते हैं.

यौन संबंध करनेवालो मे 25 % किशोर-किशोरियाँ यौन रोगो से पीडित हैं .
असुरक्षित यौन-संबंध करनेवालो मे 50 % को गोनोरिया ,33 % को जैनिटल  हर्पिस और एक प्रतिशत को ेडस का रोग होने की सम्भावना है .
एडस के नये रोगियो मे 25 % रोगी 22 वर्ष से छोटी उम्र के होते हैं. आज अमेरिका  के 33 % स्कूलो मे ंयौन-शिक्षा के अंतर्गत , केव संयम , की शिक्षा दी जाती है. िस के लिये अमेरिका ने 40 करोड से अधिक डाँलर  ( 20 अरब रूपये ) खर्च किये जाते हैं.





Wednesday, January 4, 2012

इसे आप चमत्कार कह सकते हैं -- "गीता जब मैं पढ़ता हूं..


इसे आप चमत्कार कह सकते हैं -- "गीता जब मैं पढ़ता हूं….. फिर मेरे चारों और क्‍या हो रहा इस की मुझे 
कुछ फिकर नहीं रहती है। मैं तो स्‍वय में डूब जाता हूं। और एक दीपक जलता रहता है बहार। और में अपने 
होश को मात्र सम्‍हाले रहता हूं। " - कशी नरेश




काशी नरेश का एक ऑपरेशन हुआ उन्‍नीस सौ दस में। पाँच डाक्‍टर यूरोप से ऑपरेशन के लिए आए। पर 
काशी नरेश ने कहा कि मैं किसी प्रकार का मादक द्रव नहीं ले सकता। क्‍योंकि मेंने मादक द्रव्‍य लेना छोड़ 


दिया है। तो मैं किसी भी तरह की बेहोश करने वाली कोई दवा, कोई इंजेक्‍शन, वह भी नहीं ले सकता, 
क्‍योंकि मादक द्रव मैंने त्‍याग दिये है। न मैं शराब पीता हूं, न सिगरेट पीता हूं, मैं चाय भी नहीं पीता। तो 


इसलिए ऑपरेशन तो करें आप—अपेंडिक्‍स का ऑपरेशन था। बड़ा ऑपरेशन होगा कैसे? इतनी भयंकर 
पीड़ा होगी, और आप चीखे-चिल्‍लाए, उछलने-कूदने लगे तो बहुत मुशिकल हो जाएगी। आप सह नहीं 
पाएंगे। उन्‍होंने कहा कि नहीं, मैं सह पाऊंगा। बस इतनी ही मुझे आज्ञा दें कि मैं अपना गीता का पाठ करता 
रहूँ। तो उन्‍होंने प्रयोग करके देखा पहले। उँगली काटी। तकलीफ़ें दीं, सूइयाँ चुभायीं, और उनसे कहा कि आप 
अपना…..वे अपना गीता का पाठ करते रहे। कोई दर्द का उन्‍हें पता न चला। फिर ऑपरेशन भी किया गया। 
वह पहला ऑपरेशन था पूरे मनुष्‍य जाति के इतिहास में, जिसमें किसी तरह के मादक-द्रव्‍य का कोई प्रयोग 
नहीं किया गया। काशी नरेश पूरे होश में रहे। ऑपरेशन हुआ। डाक्‍टर तो भरोसा न कर सके। जैसे कि लाश 
पड़ी हो सामने, जिंदा आदमी ह हो मुर्दा आदमी हो। ऑपरेशन के बाद उन्‍होंने पूछा कि यह चमत्‍कार है, 
आपने क्या क्‍या? उन्‍होंने कहा, मैंने कुछ भी नहीं किया। मैं सिर्फ होश सम्‍हाले रखा। और गीता पढ़ता रहा, 
और गीता जब मैं पढ़ता हूं, इसे जन्‍म भर से पढ़ रहा हूं। और गीता जब मैं पढ़ता हूं….. फिर मेरे चारों और 
क्‍या हो रहा इस की मुझे कुछ फिकर नहीं रहती है। मैं तो स्‍वय में डूब जाता हूं। और एक दीपक जलता 
रहता है बहार। और में अपने होश को मात्र सम्‍हाले रहता हूं।


एसे हमारे राजा महाराजा होते थे ...... जिनकी कहानियां आज पढने को भी नही मिलती .... हाँ इश्क विश्क के बारें मे पूछ सकते है कुछ भी बच्चो से .. मैं मानता हूँ इस मे सारा का सारा दोष हमारी सरकारों का है जिन्होंने sylabus से इन सब कहानियों को गायब सा कर दिया है .... इस बारें मे सोचने की जरुरत है ..आजकल फिल्मो को देख कर बचे भी बंदर छाप हो रहे है .देश धर्मं और परिवारवाद समाप्त हो रहीं है ..... लिखना बहुत कुछ चाहता हूँ..समय का आभाव है इसका जीकर अगले चिट्ठे मे करूँगा ..... 




आपका कँवर विक्रांत सिंह